भारत उत्कर्ष महायज्ञ में शत्रु नाश हेतु हुआ विशिष्ट यज्ञ 108 कुंडों में सामूहिक आहुतियों के साथ जन-कल्याण की प्रार्थना
नोएडा llमहर्षि महेश योगी संस्थान द्वारा आयोजित 108 कुण्डीय भारत उत्कर्ष महायज्ञ के पाँचवें दिन “शत्रु नाश यज्ञ” का विशेष आयोजन किया गया। विशाल रामलीला ग्राउंड में हजारों श्रद्धालुओं की उपस्थिति में यजमानों ने एक साथ अग्नि में आहुति अर्पित कर व्यक्ति, समाज और राष्ट्र के कल्याण की मंगलकामना की।

इस यज्ञ का उद्देश्य केवल बाहरी शत्रुओं का नाश ही नहीं, बल्कि मनुष्य के भीतर बसे मानसिक और आध्यात्मिक शत्रुओं का भी शमन करना बताया गया। यज्ञ के दौरान वैदिक मंत्रों की ध्वनि और अग्निहोत्र की पवित्र सुगंध से पूरा परिसर आध्यात्मिक ऊर्जा से भर गया।
महर्षि महेश योगी संस्थान के अध्यक्ष अजय प्रकाश श्रीवास्तव ने बताया कि यह यज्ञ तीन प्रकार के शत्रुओं के नाश के लिए किया गया —
1. अंतः शत्रु: काम, क्रोध, लोभ, मोह जैसे वे दोष जो मनुष्य के भीतर ही छिपे रहते हैं।
2. वाह्य शत्रु: वे चुनौतियाँ और बाधाएँ जो सीधे रूप में व्यक्ति या समाज के सामने आती हैं।
3. गुप्त शत्रु: वे नकारात्मक शक्तियाँ या परिस्थितियाँ जिन्हें हम देख नहीं सकते, लेकिन जो प्रगति में अवरोध बनती हैं।
उन्होंने कहा, “जब तक व्यक्ति अपने भीतर के शत्रुओं पर विजय नहीं पाता, तब तक समाज और राष्ट्र की उन्नति भी अधूरी रहती है। यह शत्रु नाश यज्ञ व्यक्ति और देश दोनों की रक्षा तथा उन्नति का मार्ग प्रशस्त करता है।”
यज्ञ स्थल पर उपस्थित श्रद्धालुओं ने इसे एक अनोखा और सकारात्मक अनुभव बताया। सभी ने माना कि भारत उत्कर्ष महायज्ञ में प्रत्येक दिन किसी नई आध्यात्मिक परंपरा का अनुभव हो रहा है, जो मन, समाज और राष्ट्र—तीनों को सशक्त कर रहा है। इस भारत उत्कर्ष महायज्ञ में अब तक करीब 5 लाख से ज्यादा लोग शामिल हो चुके हैं जो उम्मीद से कहीं अधिक हैं, जिसको देखते हुए अब प्रबंध समिति आने वाले दिनों के लिये विशेष इंतजाम करने में लगे हुए हैं ।
इस महायज्ञ में 25 नवंबर तक प्रतिदिन विशेष अनुष्ठान, सांस्कृतिक कार्यक्रम और आध्यात्मिक गतिविधियाँ आयोजित की जाएँगी। प्रवेश निःशुल्क है और कोई भी इस आध्यात्मिक–सांस्कृतिक आयोजन में शामिल हो सकता है ।



