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खेतों में काम करने वाले किसान हमारे मार्गदर्शक- केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह

नई दिल्ली ll भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (आईसीएआर) की 96वीं वार्षिक आम बैठक केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण और ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान की अध्यक्षता में हुई। इसमें 15 राज्यों के मंत्रियों सहित केंद्रीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी व पृथ्वी विज्ञान राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) श्री जितेंद्र सिंह, मत्स्य पालन, पशुपालन व डेयरी राज्य मंत्री श्री एस.पी. बघेल व राज्य मंत्री श्री जॉर्ज कुरियन, कृषि एवं किसान कल्याण राज्य मंत्री श्री भागीरथ चौधरी शामिल हुए व अपने सुझाव दिए।

बैठक में केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह ने कहा कि राज्य सरकारों के सहयोग के बिना कृषि की उन्नति के प्रयास अधूरे हैं। केंद्र व राज्यों को मिलकर कृषि क्षेत्र के लिए कार्य करना होगा। प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी हमारे मार्गदर्शक हैं, उनके विजन और नेतृत्व में पिछले वर्षों में खाद्यान्न उत्पादन में आश्चर्यजनक वृद्धि हुई है। एक समय था जब हमें निम्न गुणवत्ता वाला गेहूं अमेरिका से आयात करके खाना पड़ता था। भारत के बारे में यह छवि थी कि हम कभी खाद्यान्न के मामले में आत्मनिर्भर नहीं बन सकते, लेकिन आज यह छवि व मिथक पूरी तरह से धूमिल हो गया है। खाद्यान्न के मामले में भारत रिकॉर्ड कायम कर रहा है। अन्न के भंडार भर रहे हैं। खाद्यान्न उत्पादन में रिकॉर्ड स्तर पर वृद्धि दर्ज की गई है। हम कृषि उत्पाद निर्यात कर रहे हैं।

शिवराज सिंह ने उपलब्धियों के लिए कृषि वैज्ञानिकों को बधाई देते हुए कहा कि ग्लोबल वार्मिंग सहित विभिन्न चुनौतियों के मद्देनजर वैज्ञानिकों को काम करना होगा। विकसित कृषि संकल्प अभियान में जो सुझाव-तथ्य उभरकर आए हैं, उन्हीं के आधार पर आगे का मार्ग प्रशस्त होगा और राज्यों-क्षेत्रों तथा किसानों की वास्तविक जरूरतों के अनुसार फोकस करके कृषि अनुसंधान व किस्में विकसित करने का काम करना होगा। श्री चौहान ने कहा कि खेतों में काम करने वाले किसान हमारे मार्गदर्शक है। कृषि का वैज्ञानिक ज्ञान, व्यवहारिक ज्ञान के रूप में किसानों तक पहुंचना चाहिए। सोयाबीन, दलहन, तिलहन में और अधिक शोध व काम की जरूरत है। गेहूं, चावल, मक्के के साथ दलहन, तिलहन व अन्य फसलों के उत्पादन में वृद्धि को लेकर तेजी से प्रयास करने होंगे। शिवराज सिंह ने कहा कि फसलवार बैठकों का क्रम शुरू किया जा चुका है। सोयाबीन पर मध्य प्रदेश के इंदौर में वृहद बैठक की गई है। कपास, गन्ने, अन्य फसलों को लेकर भी विशेष बैठकें की जाएगी। 11 जुलाई को कोयम्बटूर में कपास को लेकर संवाद होगा

श्री चौहान ने कहा कि रबी सीजन से पहले राज्यों के साथ मिलकर फिर से ‘विकसित कृषि संकल्प अभियान’ के जरिए किसानों तक विज्ञान को ले जाने की कोशिश होगी। इस बार रबी सम्मेलन दो दिन होगा। पहले दिन रूपरेखा तय होगी, दूसरे दिन राज्यों के कृषि मंत्री तय रूपरेखा को अनुमोदित करते हुए अंतिम कार्ययोजना को रूप देंगे। उन्होंने कहा कि भारत की माटी की उर्वरक क्षमता अतुलनीय है। यकीन है कि हम देश व दुनिया के लिए भी अन्न उपजाएंगे और भारत दुनिया का फूड बॉस्केट बनेगा। शिवराज सिंह ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री मोदी का संकल्प है- विकसित भारत का निर्माण। इसकी पूर्ति के लिए हमने अपने आप को समर्पित कर दिया है। विकसित भारत के लिए विकसित खेती-समृद्ध किसान जरूरी है, जिसके लिए कोई कसर नहीं छोड़ेंगे। मैं खेतों में जाकर किसानों से मिलकर खेती को जमीनी स्थिति समझने की कोशिश कर रहा हूं। कश्मीर के सेब हो, केसर हो, उ.प्र. का गन्ना या कर्नाटक की सुपारी, सब जगह जाकर खेती को नजदीक के समझने व भावी रणनीतियों को लेकर प्रयासरत हूं।

केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह ने कहा कि खेती मात्र एक व्यवसाय नहीं, बल्कि देश सेवा है। हमें भारत की खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित करनी है। 144 करोड़ आबादी के लिए खाद्यान्न सुरक्षा के साथ पोषणयुक्त आहार उपलब्ध करवाना है, आने वाली पीढ़ी के लिए धरती को सुरक्षित रखना है, हमारा लक्ष्य सिर्फ देश ही नहीं, बल्कि दुनिया के लिए भी अन्न की उपलब्धता करवाना है। उन्होंने कहा कि वर्तमान में भौतिक प्रगति की चाह में दुनिया के कई देश ऐसे कदम उठा रहे हैं, जिससे प्रकृति को नुकसान हो रहा है, लेकिन हमें ऐसा मार्ग चुनना है जो प्रकृति को नुकसान पहुंचाए बिना, विकास की दिशा प्रशस्त करें।

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