मिथिला की धरती पर गूँजा गौ, गंगा, गीता और सनातन का संकल्प: गुरु गौतम ऋषि
मधुबनी (बिहार): मिथिलांचल की प्रांजल और पावन भूमि पर विगत दिनों जन्माष्टमी के अवसर पर धार्मिक और सांस्कृतिक रंग बिखर गया। जिले के कोरहिया गांव में आयोजित भव्य भागवत कथा में देश के प्रसिद्ध ज्योतिषाचार्य, ज्योतिष शिरोमणि एवं अखिल भारतीय गुरुकुल गौशाला एवं अनुसंधान संस्थान के संस्थापक एवं राष्ट्रीय अध्यक्ष गुरुजी गौतम ऋषि ने विशिष्ट एवं मुख्य अतिथि के रूप में शिरकत की।
कार्यक्रम में व्यास पीठ पर विराजमान अमरनाथ दास जी महाराज के मुखारविंद से भागवत कथा का रसपान कर श्रद्धालु भावविभोर हो उठे। इस अवसर पर गुरुजी ने उपस्थित भक्तों को संबोधित करते हुए गौ, गंगा, गीता, गायत्री और सनातन धर्म के लिए संकल्प लेने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि मिथिला की यह पवित्र भूमि धन्य है, जहां प्रभु श्रीराम स्वयं पधारे थे और आज यहां आकर उन्हें भी अपार सौभाग्य की अनुभूति हो रही है।
गुरुजी ने मिथिलांचल के प्रत्येक परिवार से अपील की कि वे अवश्य ही गौ सेवा का संकल्प लें, अपने घर में कम से कम एक गोवंश का पालन करें और प्रतिदिन प्रातःकाल भोजन का पहला अंश गौ माता को समर्पित करें। उन्होंने कहा कि इससे परिवार में सुख-शांति और समृद्धि का वास होगा। साथ ही उन्होंने कहा कि सनातन धर्म के प्रति संकल्पबद्ध होकर समाज को एकजुट करने की आवश्यकता है।
अपने संबोधन में गुरुजी ने स्पष्ट किया कि गौ माता केवल दुग्ध प्रदाता पशु नहीं, बल्कि सनातन संस्कृति की आत्मा हैं, जिनके शरीर में सभी देवी-देवताओं का वास है। उन्होंने श्रद्धालुओं से अपील की कि वे गौशालाओं से जुड़ें, अनुसंधान कार्यों का अध्ययन करें और गौ सेवा को धर्म और समाज दोनों की समृद्धि का आधार बनाएं।
गुरुजी के इन विचारों से उपस्थित श्रद्धालु गहराई से प्रभावित हुए और कृतज्ञता भाव में उन्होंने भरोसा दिलाया कि वे गौ, गंगा, गीता, गायत्री और सनातन के लिए सदैव संकल्पबद्ध रहेंगे।
इस अवसर पर कार्यक्रम के अध्यक्ष व शिक्षक चंद्र नारायण यादव समेत कई गणमान्य व्यक्तियों ने मिथिला की परंपरा के अनुरूप गुरुजी गौतम ऋषि का पाग और दुपट्टा ओढ़ाकर सम्मान किया। आयोजन समिति ने गुरुजी के आगमन पर आभार व्यक्त करते हुए आग्रह किया कि वे प्रतिवर्ष इस पावन अवसर पर मिथिला की भूमि पर पधारकर श्रद्धालुओं को धर्म और संस्कृति का मार्गदर्शन देते रहें।।



