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आईएमएस-डीआईए में पर्यावरण संकल्प यात्रा का आयोजन वृक्षारोपण कर कार्यक्रम का शुभारंभ

नोएडा। आईएमएस-डीआईए में पर्यावरण जागरूकता कार्यक्रम पर्यावरण संकल्प यात्रा का भव्य आयोजन किया गया। इस अवसर पर पर्यावरणविदों, सामाजिक संगठनों, युवाओं एवं नागरिकों की सक्रिय सहभागिता देखने को मिली। कार्यक्रम के दौरान युवाओं ने सतत एवं जिम्मेदार जीवनशैली को अपनाने का सामूहिक संकल्प लिया।

कार्यक्रम की शुरुआत करते हुए प्रसिद्ध पर्यावरणविद्, सामाजिक नवप्रवर्तक, ट्री मैन एवं गिफ्ट ए ट्री नेटवर्क के चेयरपर्सन डॉ. दीपक रमेश गौड़ ने पर्यावरण संकल्प यात्रा की परिकल्पना, उद्देश्य और दीर्घकालिक दृष्टि को साझा किया। उन्होंने कहा कि आज पर्यावरण संरक्षण केवल एक अभियान नहीं, बल्कि जन-भागीदारी से जुड़ी एक सामूहिक चेतना है। समुदाय आधारित प्रयासों और दीर्घकालिक पारिस्थितिक जिम्मेदारी पर बल देते हुए उन्होंने इसे भविष्य की पीढ़ियों के प्रति हमारा नैतिक दायित्व बताया। कार्यक्रम के दौरान डॉ. गौड़ ने सहस्रधारा ज्ञान फाउंडेशन का प्रतिनिधि दीपक वर्मा को प्रतीकात्मक बैटन देकर पर्यावरण संकल्प यात्रा को नोएडा से देहरादून तक आगे ले जाने की जिम्मेदारी सौंपी।

सहस्रधारा ज्ञान फाउंडेशन के प्रतिनिधि दीपक वर्मा ने औपचारिक रूप से पर्यावरण संकल्प यात्रा की विस्तृत कार्ययोजना प्रस्तुत की। उन्होंने बताया कि यह यात्रा नोएडा से प्रारंभ होकर गाजियाबाद, मेरठ, सहारनपुर, रुड़की एवं हरिद्वार होते हुए देहरादून में संपन्न होगी। उन्होंने यात्रा के प्रस्तावित कार्यक्रम, प्रमुख पड़ावों, समय-सारणी एवं ठहराव की व्यवस्थाओं की जानकारी देते हुए प्रत्येक चरण में जनभागीदारी, पर्यावरण जागरूकता और सतत जीवनशैली के प्रति साझा जिम्मेदारी पर विशेष जोर दिया।

आईएमएस-डीआईए के वाइस प्रेसिडेंट चिराग गुप्ता ने वृक्षारोपण करते हुए कहा कि शैक्षणिक संस्थानों की भूमिका केवल शिक्षा तक सीमित नहीं है, बल्कि समाज और पर्यावरण के प्रति जिम्मेदार नागरिक तैयार करना भी हमारी प्राथमिक जिम्मेदारी है। पर्यावरण संकल्प यात्रा जैसे प्रयास युवाओं को नेतृत्व, संवेदनशीलता और सतत विकास की दिशा में प्रेरित करते हैं। आईएमएस-डीआईए ऐसे जनहितकारी अभियानों के साथ निरंतर खड़ा रहेगा।

वहीं आईएमएस- डीआईए के डीन डीन प्रो. डॉ. एम.के.वी. नायर ने बताया कि आज के कार्यक्रम में पर्यावरण संरक्षण के प्रति सामूहिक सोच को मजबूती प्रदान की और जन-आधारित सहभागिता के माध्यम से प्रकृति संरक्षण के संकल्प को नई दिशा दी।

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